प्रिय मित्रों,
इस ब्लॉग के माध्यम से मैं अपनी रचनाओं का परिचय आपको करूँगा और आपके सुझाव व
आलोचनाओ का स्वागत करूँगा ताकि बेहतर रचना दे सकू. प्रस्तुत है पहली कविता इस ब्लॉग पर.
धन्यवाद.
रामकिशोर उपाध्याय
19.10.2011
'लोग कहें मधुप, मैं कहूँ फ़कीरी'
हूँ विनम्र , पर झुकता नहीं मस्तक ,
लोग कहे अभिमानी, मैं कहूँ खुद्दारी.
हूँ राजा , पर लुटता नहीं अविवेक,
लोग कहें कृपण, मैं कहूँ व्यवहारी .
हूँ समर्पित, पर करता नहीं अनुकरण,
लोग कहें एकाकी, मैं कहूँ मजेदारी .
हूँ कठोर ,पर थोपता नहीं अनुशासन,
लोग कहें मृदुल , मैं कहूँ समझदारी .
हूँ मुक्त, पर भूलता नहीं अनुपालन,
लोग कहें मधुप, मैं कहूँ फ़कीरी.
२४.९.२०११