Wednesday, 17 July 2013

कोई अपना यूँ ऐसे ही नहीं बनता !















अगर चाहे तू मेरी ख़ुशी को पाना
तो पहले मेरे  दर्द से भीग  जाना

कोई अपना यूँ ऐसे ही नहीं बनता
अना  को पड़ता है छोड़कर  आना  

रामकिशोर उपाध्याय

4 comments:

  1. आपकी यह पोस्ट आज के (१७ जुलाई, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - आफिसर निर्मलजीत सिंह शेखो को श्रद्धांजलि पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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    1. तुषार राज जी आपका हृद्य से आभारी हूँ

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  2. सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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  3. मदन मोहन सक्सेना जी धन्यवाद . मैं आपका ब्लॉग अवश्य पढूंगा .

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