Tuesday, 4 June 2013


वो निकल गयी 
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जाते जाते वो मुह   फेरकर निकल  गयी
हमें लगा कि  सारी तमन्ना निकल गयी

दिल में दर्द लिए वह आंसू में पिघल गयी
इसलिए  हमसे मुह फेर कर निकल गयी

वो मिली भी नहीं थी एक बार हमसे रूबरू
फिर भी ऐसा लगा कि रूह थी निकल गयी

सिर्फ कुछ लम्हों में थी बातें उनकी हमारी
जाने क्या था, मानों उम्र पूरी निकल गयी

यह प्रेम था या कुछ और नहीं हुआ मालूम
इसी शशपंज में सारी कहानी निकल गयी

(c) रामकिशोर उपाध्याय

10 comments:

  1. आज ०४/०६/२०१३ को आपकी यह पोस्ट ब्लॉग बुलेटिन - काला दिवस पर लिंक की गयी हैं | आपके सुझावों का स्वागत है | धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (05-06-2013) के "योगदान" चर्चा मंचःअंक-1266 पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. Dr. Saheb, apka anugrah mere upar bana hua hai. Dhanyvad bhi chhota shabd maloom hota hai apke liye.

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  4. सिर्फ कुछ लम्हों में थी बातें उनकी हमारी
    जाने क्या था, मानों उम्र पूरी निकल गयी------
    वाह बहुत सुंदर
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    आग्रह है
    गुलमोहर------

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    1. ज्योति जी , आपके स्नेहपूर्ण शब्दों के लिए आभार

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