Tuesday, 19 August 2014

समय











अंतिम घड़ी में
पिता ने पुत्र को निकट बुलाया
एक पुड़िया देते हुए कहा
पुत्र, इसे संभालकर रखना
यह हमारे पूर्वजों की निशानी है
पुत्र ने जेब में रखना चाहा
पिता ने सोचा कि वह पुत्र को टोके
पुत्र एक बार इसे खोलकर तो देखे ?
पुत्र अंतिम संस्कार तक रुका
फिर खोलकर देखा
पुड़िया तो खाली है
परन्तु उसमे तीन अक्षर लिखे थे
जिनमे पूरा ब्रह्माण्ड समाया
अनमोल अक्षर थे
'समय'  
हां समय ......|
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रामकिशोर उपाध्याय



6 comments:

  1. बहुत सही
    समय से बढ़कर कुछ नहीं ....

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    1. कविता रावत जी ..सराहना के लिए ह्रदय से आभार ..

      रामकिशोर उपाध्याय

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (21-08-2014) को "लेखक बनाने की मशीन" (चर्चा मंच 1712) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आ. रूपचन्द्र शास्त्री जी रचना को सम्मान देने के लिए ह्रदय से आभार ..

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  3. Replies
    1. आशीष भाई जी सराहना के लिए ह्रदय से धन्यवाद ...

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