Tuesday, 27 December 2016

फ़िलहाल ............

फिलहाल....
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रेत के ढूह 
सिकती है रूह 
दिखती नहीं छाँव 
लोहे के पाँव
चले कैसे..
फिलहाल
लाइन में खड़ा है वो
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रामकिशोर उपाध्याय

2 comments:

  1. नोटबंदी में खड़े एक मजबूर इंसान की मजबूरी बयान करती अति सुंदर क्षणिका।

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    1. आदरणीय सराहना के लिए हृदय से आभार

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