Tuesday, 16 December 2014

लक्ष्य से पहले

लक्ष्य से पहले
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चक्र
समय का चलता है
शाश्वत है ...
दक्षिणमुखी गति में
अनंत कष्टकारी होता है .....
परन्तु कहते हैं
मनुज
मंदिर की परिक्रमा
अगर दक्षिणमुखी करे
तभी वांछित फल मिलता है .....फल और गति
पल और मति
और
बल और युति में भी एक शाश्वत सम्बन्ध है ....
जैसे मनुज के पाँव होना
चलने के लिए
कर्म-पथ पर
न कि थककर रुकने के लिए ............
लक्ष्य से पहले ..|
***
रामकिशोर उपाध्याय

6 comments:

  1. बहुत सार्थक प्रस्तुति...

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    1. आ. कैलाश शर्मा जी सराहना के लिए ह्रदय से आभार

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (17-12-2014) को तालिबान चच्चा करे, क्योंकि उन्हें हलाल ; चर्चा मंच 1829 पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आ. रूपचन्द्र शास्त्री जी धन्यवाद और स्नेह बनाये रखे ..नमन

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  3. बहुत बढ़ि‍या...सार्थक अभि‍व्‍यक्‍ति‍

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  4. रश्मि शर्मा जी सराहना के लिये हृदय से आभार

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