After the night's noisy lull
Chirping of birds brings life to full
The rays on the chariot give the wake up call
The fountain say take steps big or small
Do the deeds with love that enthrall
It is the hardwork that brings bread and may be butter
Remove the sad thoughts and mind's clutter
Hope in the eyes and smile on face
Keep you running and winning the race
So say thanks to Almighty
For giving the body and thought so mighty.
*
Ramkishore Upadhyay
Saturday, 22 April 2017
Good morning
लघु गीत
मत पढ़ाओ
है सभी खून से लथपथ
किसे परवाह कौन बोल गया
और क्या रह गया अकथ
शांत सागर में अब उठती हैं ऊँची ऊँची लहरें
वो भी अमावस में
चाँद पर भी अब लग गए हैं पहरें
वो भी मधुमास में
किसको अब चिंता है
किसकी पीठ पर बंधा ,किसी के पेट में या किसे के साथ
एक वही मासूम बिलखता भूख से
है बस दो निवालों की दरकार
उसे जो आज फिर चौराहे से गया खाली हाथ
मत पढ़ाओ उसको 'विश्व पृथ्वी दिवस' का पाठ ......बरखुरदार
*
रामकिशोर उपाध्याय
Wednesday, 19 April 2017
Faith and Prayer
Faith and Prayer
Are the two arms of life's warfare
Yet invisible,but perfectly potent and fair
So work hard and chant hyms rare
God is not far away,dive deep and find him there
HE is the one who brings hope and removes despair
*
Ramkishore Upadhyay
दो बूँद का सागर
अनिल हूँ मैं ...
मुझे तुम्हारी फैक्ट्री से निकलते
जहरीले धुएं से क्या काम
मुझे तो तोड़ देनी है ...
नफरत और जलन उगलती
सभी अयाचित चिमनियाँ
*
अनल हूँ मैं ....
मुझे तुम्हारे घर के बाहर लगे
झाड़-फूँस से क्या काम
मुझे तो जला देनी हैं
दीमक लगी कमजोर
सभी अवांछित दरवाजों की चौखटें,खिड़कियाँ
*
सलिल हूँ मैं
बहा ले जायेगा तुम्हारे भीतर का लावा
घुल जायेगी जहरीली हवा
मेरे विशाल वक्षस्थल में
जहाँ उद्धत है समेटने को शुष्क सरिताएँ
क्या तुम्हारे दो नयन हो सकते हैं वो बदलियाँ
तुम्हारे ही लिए
जो मुझे दे सके
दो बूंद का सागर ....
*
रामकिशोर उपाध्याय
Tuesday, 21 March 2017
आज विश्व कविता दिवस पर। ..........कवि झूठा हो सकता है..
मगर व्यक्त एक-एक शब्द होता है मानीखेज
हर शब्द कई रंगों में डूबा हो सकता है
मगर कवि होता है मन को इन्द्रधनुषी रंगों में रंगने वाला रंगरेज
कवि झूठा हो सकता है
मगर उसकी कविता होती है सच का दस्तावेज ........................... *...........................
रामकिशोर उपाध्याय
Saturday, 4 March 2017
प्रश्न क्या करे नचिकेता ?
क्यों बैठे हो द्वार से सटकर ?
तीन दिवस से हठकर
क्या तुम्हे यह नहीँ बतलाया
कि नहीँ ठहरते द्वार पर
क्या स्वर्ग नर्क का ठिकाना नहीँ किसी ने दिखाया
हो कौन तुम ?
मैने तो तुम्हे नहीँ बुलवाया
नही हूँ किसी ऋषि की संतान
रखता हूँ बस साधारण मानव सी पहचान
नहीँ आया हूँ पाकर अपने पिता का शाप
मुझे तो बस काट गया था मानवता का साँप
फिर आना पड़ा यहाँ श्रीमान
कहते है यही विधना का था फ़रमान
जब थे नहीँ तुम नचिकेता
फिर क्यों रहा द्वार पर तीन दिन बैठा
बोला तो है प्रभु , हूँ एक मानव जात
हाय ! यहाँ भी पडने लगी लात
मेरा भी कुछ अधिकार
हो शक्ति सम्पन्न,हो जाये कुछ मेरा भी उद्धार
सुनो प्रभु !!
नहीँ चाह मुझे पहचाने अगले जन्म में पिता
उसने ही ने तो मुझे था उस नरक में घसीटा
क्या तुम दे सकते अभय का वरदान ?
जाकर मैं कर सकूं लेखनी से स्वतंत्र सृजन अवदान
कुछ और मांगो वत्स !
ओके !!
चाह नहीँ मुझको मिले अमरता का ज्ञान
मुझको मानव होने में ही हौ सुख महान
थी धरा पर सुरम्य घाटियाँ
खिलती थी फूलों सी बेटियों की क्यारियाँ
क्या तुम दे सकते हो कि हो सुरक्षित सब नारियां
कुछ और मांगो वत्स !!
राइट सर !ii
चाह नहीँ मुझको जानूं हवन विधि और कहलाऊँ अग्निहोत्र
धन लेकर पाप खरीदूं दूजों के बतलाकर स्वगोत्र
क्या सिखला सकते हो करे सब कैसे वो अपने-अपने कार्य
हलवाहे,श्रमिक,शिक्षक हो नेता अभिनेता और अधिकारी से अधिक स्वीकार्य
कुछ और मांगो वत्स !!
मगर क्यों !!!!
तीन प्रश्न थे नचिकेता के जिनके तुमने दिये थे उत्तर
ऋषिपुत्र के सामने हुये तुम्ही थे निरुत्तर
अब क्या इस युग में तुम इतने कमजोर हो
क्या रहे नहीँ अब सत्य,बस सत्य का शोर हो
वत्स,चुनाव सर पर है देवलोक में
यहाँ भी वैसा ही है जैसा भूलोक
कुछ भारतीय नेता अब यहाँ के आवासी है
ले आये यहाँ भी लोकतंत्र
कौन होगा अगला यम ,यहीं उदासी है
जिसको चाहे चुन लेना
मतदाता कॊ कुछ हरे गुलाबी नोट देना
कुछ कॊ मज़हब धरम की अफीम बाँट देना
किसी कॊ खाट पर बिठाकर समझा देना
या बिजली पानी फ्री कर देना
चुप्प !!!
वत्स ! यहाँ है सच में लोकतंत्र
नहीँ तुम्हारे वाला लठतंत्र
ज्यादा चू चा नहीँ
ले जाओ विश्रामगृह की चाबी
यहाँ बहुत है काम बाकी
चुनाव नतीजों के बाद
अगले यम ही आपके प्रश्नों के उत्तर देंगे
अभी आचारसंहिता लागू है
जो आज्ञा प्रभु !!!
*
Ramkishore उपाध्याय