Saturday, 14 September 2013

आयु
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किसी ने पूछा
मैडम क्या ऐज हैं आपकी ?
क्यों ? विवाह करोगे !
निरुत्तर हो गया प्रश्नकर्ता
और
प्रश्न निस्तेज

क्या मैं कम आयु की दिखती हैं
मेरे चार बच्चे हैं
दो पोते और पोतियां हैं
अब तक इक्कीस पुस्तके लिख चुकी हूँ
ग्यारह पर काम कर रही हैं
देखो मेरा टाइम बर्बाद मत करो
अभी बहुत दूर जाना हैं
सृजन के पथ पर
फिर खाना भी बना के खिलाना हैं
मैं थकती नहीं हूँ
मैं बहती नदी हूँ

किसी से उसकी ऐज मत पूछो
उसका सृजन जान लो
इस नश्वर देह की आयु हैं
उसके भीतर उर्जा की नहीं
जीवन के उस पार भी उसका
समाज के प्रति अवदान अक्षुण्य रहेगा
मैं अंतिम समय तक सृजन करुँगी
संतान का नहीं
मानसिक पुत्र और पुत्रियों का

हाँ,पूछो मैंने क्या लिखा
मैंने क्या सिखाया
क्या लौटाया इस समाज को
आयु का प्रश्न सिर्फ साइको लोग करते हैं
क्या तुम साइको हो?
उत्तर था नहीं
लो पढो मेरी यह पुस्तक
'आयु शरीर की नहीं मन की स्थिति हैं '
पढने के बाद  फोन करना,
फिर बताना
तुम कितने प्रौढ़  हुए-------------------------
और मैं कितनी युवा हूँ ……………………………

रामकिशोर उपाध्याय
14-9-2013 

5 comments:

  1. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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    1. महोदया, आपकी इस प्रशंसा के लिए ह्रदय से आभारी हूँ।

      शुभेच्छु

      रामकिशोर उपाध्याय

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लागर्स चौपाल में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शनिवार हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल :007 http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/ लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर ..

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    1. महोदया, आपकी इस प्रशंसा के लिए ह्रदय से आभारी हूँ।

      शुभेच्छु

      रामकिशोर उपाध्याय

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