Thursday, 18 May 2023

अहम पहाड़ सा


भगवान से वरदान पाये 

मनुष्य का कद 

अकसर बढ़ने लगता है 

अनियंत्रित होकर 

विंध्याचल पर्वत की भाँति 

और रोकने लगता है 

आने से दूसरों के जीवन में प्रकाश 

फैला देता है अंधकार का साम्राज्य 


लेकिन तभी कोई आता है 

लोगों के जीवन में उजाला लेकर 

और युक्ति से प्राप्त कर लेता है पर्वत से 

और न बढ़ने का आश्वासन 

अगस्त्य ऋषि बनकर 


जब -जब अहं बढ़ता है 

विंध्य पर्वत सा 

तब -तब कोई न कोई आ ही जाता है 

बिलकुल ज़रूरी नहीं वह कोई एक ऋषि हो 

अक्सर साधारण से लगने वाले 

मनुष्यों का समूह  भी तोड़ देता है 

पहाड़ सा दर्प 

किसी वरदान पाये मनुज का भी 

चाहो तो इतिहास या वर्तमान को पढ़ लो 

किसी ने ठीक ही कहा !!

*

रामकिशोर उपाध्याय

1 comment:

  1. जब -जब अहं बढ़ता है

    विंध्य पर्वत सा

    तब -तब कोई न कोई आ ही जाता है

    बिलकुल ज़रूरी नहीं वह कोई एक ऋषि हो

    अक्सर साधारण से लगने वाले

    मनुष्यों का समूह भी तोड़ देता है

    पहाड़ सा दर्प

    किसी वरदान पाये मनुज का भी

    चाहो तो इतिहास या वर्तमान को पढ़ लो

    किसी ने ठीक ही कहा !! बहुत सत्य लिखा है आपने अपनी रचना में,आदरणीय ।

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